Tuesday, February 5, 2013
आइना जिसे पहचाने
उजले बादलों में कुछ अक्स ढूँढता हूँ
ख़ुद को बयान कर दे, वो लफ्ज ढूँढता हूँ |
मंज़िलें लापता, गुमनाम हैं रस्ते
आइना जिसे पहचाने वो शख्स ढूँढता हूँ |
क्भी भीड़ का चेहरा हूँ, कभी एक हूँ लाखों में
कोई बूँद समंदर की, इक अश्क हूँ आंखों में |
मुझको समझने में अब और ना तुम उलझो
हर रोज़ पता घर का, कमबख़्त ढूँढता हूँ |
तुम ख़ुदी को कर के काबू ख़ुदा को हो पा लेते
या फिर नशे में लथपथ दोज़ख में हो जलते |
मुझपर ना कोई नेमत कयामत का ही असर है
हरदम जन्नत-ए-दोज़ख के बीच झूलता हूँ |
जैसे उम्र कि चाहत है, आहो को असर होने को
हिना सी है फितरत, डरती है तर होने को,
साज़ नहीं आवाज़ सही पर
थमती धड़कनों का शोर जरा ग़ौर से सुनता हूँ |
आइना जिसे पहचाने वो शख्स ढूँढता हूँ |
Friday, February 1, 2013
Tuesday, December 25, 2012
Monday, November 5, 2012
दस्तख़त
बरसात की वो रात
वो रात थी कुछ नम सी,
आसमाँ भी रोने को मजबूर था.
खुला था मेरे दिल का दरवाज़ा,
आहटों से उसकी बस कुछ कदम दूर था.
कुछ छीटें कभी खिड़की के रस्ते,
मेरे चेहरे को छू जाते दफातन.
जाने कब ये पहर बीत गया,
यादों में उसकी कुछ ऐसा मशगूल था .
वो ना आया पर उसकी राह तकते,
बदन पर हो गए कितने निशाँ .
डंक थे या थे उसकी तीखी नज़र,
सीने में कुछ चुभा ज़रूर था.
पहरों के पहरे भी अब मद्धम हो चले थे,
वो कातिल मेरा अँधेरे में काफूर था.
बस बची थी इक लाश, कुछ लहू के छीटें ,
और सहमा दिल अन्दर..
जो जीने को मजबूर था.
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